وتر و تراویح میں عشاں کا نام نیت میں لینا چاہیے کہ نہی



*आपका सवाल - हमारा जवाब*

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*_सवाल---- वित्र नमाज़ और तरावीह़ की नमाज़ में इशा का नाम लिया जायेगा कि नहीं,और अगर कोई वित्र व तरावीह़ नमाज़ में इशा वक़्त न लगाए तो उसकी नमाज़ हो जायेगी कि नहीं, रहनुमाई फरमाये-?_*


*_जवाब---- नमाज़े वित्र व नमाज़े तरावीह़ में इशा का नाम लेने की कोई ज़रुरत नहीं है क्योंकि ये दोनों नमाज़े शुरू ही होती हैं फर्ज़ इशा के बाद, लिहाज़ा अब ख़ास इशा का नाम लेने की असलन ह़ाजत नहीं, हुज़ूर फ़क़ीहे मिल्लत मुफ्ती जलालुद्दीन अह़मद अमजदी अलैहिर्रहमा ने अपनी ,मशहूर किताब-अनवारे शरीयत- में उर्दू ज़बान में इशा का नाम लिए बगैर ही इस तरह लिखा है_*


*_नियत की मैंने तीन रकाअत नमाज़ वाजिब वित्र की, अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा तरफ़ काबा शरीफ़ के, अल्लाहु अकबर,_* 


*📕📗अनवारे शरीयत, सफह 38*


*_नमाज़े तरावीह़ की नियत आपने यूँ तह़रीर फरमाई है-👇_*


*_नियत की मैंने दो रकाअत नमाज़ तरावीह़ की, सुन्नत रसूल अल्लाह की, अल्लाह तआला के लिए,( मुक़तदी इतना ज़रुर और ज़्यादा करे, पीछे इस इमाम के) , मुंह मेरा तरफ़ काबा शरीफ़ के, अल्लाहु अकबर_*


*📕📗अनवारे शरीयत, सफह 59- तरावीह़ का बयान.*


*_खुलासा ये है कि वित्र व तरावीह़ में खुसूसियत के साथ इशा का नाम लेना ज़रुरी नहीं है,_* 

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*_सवाल---- बहुत सारे लोग मोबाईल पर झूठ बोलते हैं, मसलन फोन करने वाला पूछता है आप कहाँ हैं यह कहता है फुलां जगह,और वहाँ होता भी नहीं है,वगैरह वगैरह, इस तरह़ झूठ बोलना कैसा?, और मोबाईल पर किसी को गाली देना कैसा है जवाब इनायत करें-?_*


*_जवाब---- झूठ, गीबत, चुगली,और गाली गलौज गुनाह और सख़्त नाजायज़ व ह़राम काम हैं,झूठ गीबत, चुगली और गाली गलौज जिस तरह मोबाईल के अलावा ह़राम हैं, इसी तरह ये चीज़ें मोबाईल पर भी ह़राम हैं, झूठ, गीबत, चुगली, और गाली गलौज, गुनाह कबीरा हैं, और गुनाहे कबीरा करने वाला दुनिया और आखिरत में अज़ाब का मुस्तहिक़ है, अल्लाह तआला क़ुरआन पाक में इरशाद फरमाता है कि_*


 *_कंज़ुल इमान---- झूठ बोलने वालों पर अल्लाह की लानत है_*


*📕📗सूरह आले इमरान, पारा 3, आयत,61*


*_ह़दीस-- हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि_*


*_जब बंदा झूठ बोलता है तो उसके मुंह की बदबू से फरिश्ते एक मील दूर हो जाते हैं_*


*_📕📗जामें तिर्मिज़ी शरीफ़ जिल्द 3, सफह 400, ह़दीस 2000-,1972_*


*_बंदे ए मोमिन कामिल नहीं होता जबतक कि मज़ाक़ में भी झूठ बोलना न छोड़े_*


*📕📗मुस्लिम इमाम अह़मद बिन अम्बल, जिल्द जिल्द 3, सफह 268, हदीस 8638*


*_आजकल हमारे मुसलमान भाई आमने सामने की मुलाक़ात और मोबाईल पर गुफ्तगू में मज़ाक़न झूठ बोल देते हैं और यह ख़्याल नहीं करते हैं कि मज़ाक़ में झूठ बोलना भी नाजायज़ और गुनाहे कबीरा है_*


*📕📗माखूज़ अज़, मोबाईल फोन के ज़रुरी मसाइल, सफह 79*


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*_सवाल---- गाय भेंस के गोबर से घर को लीपना और उसके कन्डों से रोटी बनाना ठीक है कि नहीं, जवाब इनायत फरमायें-?_*


*_जवाब---- बैल भेंस का गोबर नजासते गलीज़ा है और उस से अपना मकान वगैरह लीपना जायज़ नहीं है, जैसा कि फतावा आलमगीरी में है कि_*


*احثاء البقرۃ، نجس نجاستہ غلیظتہ ھکذا فی فتاویٰ قاضی خان،*


*📕📗फतावा आलमगीरी जिल्द 5, सफह 98*


*_हुज़ूर सदरुश्शरिया अल्लामा अमजद अली तह़रीर फरमाते हैं कि_*


*_गाय बैंल भेंस का गोबर, और बकरी ऊंट की मेंगनी यह सब नजासते गलीज़ा है_*


*📕📗बहारे शरीयत, जिल्द 01, हिस्सा 3, नजासत का ब्यान_*

*📕📗फिक़्ही मालूमात, सफह 24*


*_इन मज़कूरा इबारात से मालूम हुआ कि बैल भैंस के गोबर से मकान को लीपना ये जायज़ नहीं है और उसको आग में जलाकर उस से खाना बनाना दुरुस्त है और उसका खाना भी उस में कोई कराहत नहीं है_*


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*🌹والله تعالیٰ اعلم بالصواب🌹*

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*_(तालिब ए दुआ़ ) अ़ब्दुल वकील रज़ा नूरी (सरायक़ाज़ी ) ज़िला बहराइच शरीफ यू,पी,_*


              *_ख़ादिम_*


*_मदरसा अ़रबिया वारिसुल उलूम पैदामिन पुरवा, रसूलपुर, ज़िला बहराइच शरीफ यू.पी- No.9172527218_"*

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