وہابی کا جنم کیسے ھوا
वहाबी का जन्म कैसे हुआ !
आईये आप और हम सब जान ले की वहाबी फिरके की पैदाइश कैसे हुई ! और इनकी तालीम क्या है ? इनकी विचारधारा क्या है ? सब दलील के साथ
अरब शरीफ में 1922 तक तुर्कियो की हुकूमत थी जिसे खिलाफत-ए-उस्मानिया के नाम से जाना जाता है ! जब भी दुनिया में मुसलमानो पर जुल्म और सितम होता तो खिलाफत ए उस्मानिया इसका मुँह तोड़ जवाब देते थे !
अमेरिका , ब्रिटेन , यूरोप , नसरानी , यहूदियो को सब से बड़ा खतरा था तो खिलाफत ए उस्मानिया से खतरा था !
अमेरिका , यूरोप और बाकि लोगों को मालूम था की जब तक खिलाफत ए उस्मानिया मौजूद है , हम मुसलमानो का कुछ नही बिगाड़ सकते ! अमेरिका और यूरोप ने मिल कर खिलाफत ए उस्मानिया को ख़त्म करने की साजिश की और कामयाब भी हुए ! अमेरिका और यूरोप ने एक शख्स को खड़ा किया जो क्रिस्टियन था ऐसी अरबी जुबान बोलता था की किसी को उसपर शक भी नही आया !
उसने अरब के लोगो को खिलाफत ए उस्मानिया के खिलाफ ये कहकर गुमराह करने की नाकाम कोशिश की तुम अरबी हो और ये तुर्की अजामी ! ( गैर अरबी ) तुमलोग अजामी की हुकूमत को कैसे बर्दाश्त कर रहे हो ? लेकिन लोगो ने उसकी एक नही सुनी ! ( उस वक़्त के अरबी सुन्नियो ने )
ये शख्स laurance of arabian नाम से मश्हूर हुआ ( आप लोग laurance of arabian टाइप कर के गूगल पे देख सकते है )
फिर अमेरिका ने एक और शख्स को खड़ा किया जिसका नाम हेम्फेर था ! ( आप गूगल पर hempher की विकिपीडिया पढ़ सकते है ) हेम्फेर की मुलाकात मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब नजदि और एक डाकू जिसका नाम इब्ने सऊद था उनसे हुई !
हेम्फेर ने डाकू इब्ने सऊद को और मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब नजदि को अरब का हुक्मरान बनाने का लालच दिया ! फिर इन लोगो ने मक्का , मदीना और ताइफ़ में तुर्की हुकूमत से जंग शुरू कर दी ! मक्का , मदीना और ताइफ़ के लाखो मुसलमान डाकू इब्ने सऊद के हाथो शहीद हुए ! धीरे धीरे डाकू सऊद की फ़ौज हरम तक पहुच गयी , जब तुर्कियो ने देखा की इब्ने सऊद हमें अरब से निकालने और खुद हुकूमत करने के लिए मक्का , मदीना और ताइफ़ के बेशुमार मुसलमानो को शहीद कर रहा है , तब तुर्कियो ने आलमी तौर पर ये ऐलान किया की हम इस पाक जमीन पर क़त्ल और गारत पसंद नही करते ! इस वजह से हम खिलाफत ए उस्मानिया को ख़त्म कर के अपने वतन तुर्की वापस जा रहे है !
फिर अरब और दुनिया के मुसलमानो का जवाल शुरू हुआ , इब्ने सऊद डाकू और मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब नजदि अरब के हुक्मरान हुए ! हिजाज ए मुक़दस का नाम 1400 साल की तारीख में पहली बार बदला गया डाकू सऊद ने अपने नाम पर हिजाज ए मुक़द्दस का नाम सउदिया रख दिया ! जगह जगह और चौराहे पर अब्दुल वहाब नजदि और इब्ने सऊद की तस्वीरें लगायी गयी ! हरम शरीफ के दरवाज़ों का नाम जो सहाबा रज़ियल्लाहु और अहले बैत के नाम पर थे उनको बदल कर डाकुओ के नाम से रखा गया ! यहूद और नसारा को अरब में आने की खुली परमिशन मिल गयी थी !
जिस दिन ये दोनों किंग बने इनको मुबारक बात देने के लिए अमेरिका यूरोप और दूसरे मुल्क के किंग लोग मुबारक बात देने पहुच गए ! जिस अरब के नाम से यहूद और नसारा काँपते थे वो सउदिया अब अमेरिका के इशारो पर नाचने लगा ! और आज भी उनके इशारो पर ही नाच रहा है !
अब मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब नजदि का नया फ़िरक़ा तैयार हो गया है जिसने अक़ायद ए इस्लाम की धज्जिया उडा दी और नए फिरके वहाबी की बुनियाद रखी !
#हदीस : नज्द में ईमान और अक़ायद के ज़लज़ले और फ़ितने होंगे वहा से शैतान का सींघ निकलेगा !
( हवाला : तिमिर्जी , बाब उल मुनाक़िब , हदीस न 3953 )
और इस खबीस शख्स ने 70 हजार सहाबा ए किराम के मजारो को शहीद कर दिया , और अपने जाहिल उल्लूमा इब्ने तैमिया की ताईद की और जिस हदीस में यहूद और नसारा के कब्रो को तोड़ने का और जमीन बराबर करने का हुक्म सरकार ने हजरते अली को दिया था , उसको सनद बना कर मुसलमानों और सहाबा की मज़ारो को शहीद कर दिया !
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